कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के जरिए अनिश्चित बाज़ार में पाएं सुनिश्चित आय और उत्पादन

कृषि उत्पादों की बढ़ती मांग और खाद्य सुरक्षा के चलते वैश्विक बाज़ार में लगातार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग(अनुबंध खेती) का रुझान बढ़ रहा है। InsightAce Analytic की रिपोर्ट के अनुसार, 2031 तक ग्लोबल कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की मार्केट वैल्यू 3.3% की CAGR के साथ बढ़कर 76.07 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक ऐसी कृषि उत्पादन प्रणाली है जिसमें किसान और व्यापारी (कंपनी, प्रोसेसर, निर्यातक, आदि) के बीच एक समझौता होता है। जिसके तहत किसान एक निश्चित मात्रा, गुणवत्ता और समय के अनुसार फसल का उत्पादन करते हैं, जिसे व्यापारी पहले से तय कीमत पर खरीदने के लिए सहमत होता है। इस प्रकार की कृषि उत्पादन प्रणाली में किसानों को बीज, सिंचाई और मजदूरी आदि का खर्च नहीं उठाना पड़ता। खेती की लागत और उसकी तकनीक की जिम्मेदारी भी कॉन्ट्रैक्टर की ही होती है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ खेती की दशा और दिशा दोनों में सुधार लाती है।

1. सुनिश्चित बाज़ार
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत किसानों को अपनी फसल के लिए पहले से ही सुनिश्चित बाज़ार मिल जाता है। इससे किसानों को अपनी फसल को बेचने के लिए इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होती और वे समय पर अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

2. सुरक्षित फसल मूल्य 
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत किसान और कंपनी के बीच पहले से ही फसल की कीमत तय हो जाती है। इससे किसानों को बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना नहीं करना पड़ता और उनकी आय स्थिर रहती है।

3. आधुनिक तकनीकी और संसाधनों की उपलब्धता
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत कंपनियाँ किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधन प्रदान करती हैं। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे उत्पादकता और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

4. वित्तीय सहायता
कई बार कंपनियाँ किसानों को पहले ही आर्थिक रुप से सहायता भी करती हैं। इससे किसानों को फसल उगाने के लिए, आवश्यक निवेश के लिए कर्ज लेने की जरुरत नहीं होती और वे आर्थिक दृष्टि से मजबूत रहते हैं।

5. लागत और जोखिम में कमी
कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत किसानों को फसल के लिए बाज़ार और मूल्य की गारंटी मिलती है, जिससे उनके जोखिम में कमी आती है। इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं या फसल विफलता की स्थिति में कंपनियाँ किसानों को मुआवजा भी देती हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुरक्षित रहती है।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, भारत में छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुँचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है। यह किसानों को बाज़ारों तक पहुँचने, अपनी उपज में सुधार करने और कृषि व्यापार में सक्षम बनाने में मदद करती है। एग्रीबाज़ार भी किसानों को बाज़ार से जुड़ने, वित्तीय योजनाओं तक पहुँचने, फसल सलाहकार सेवाएँ, अनुबंध प्रबंधन और प्रशिक्षण देकर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में मदद करता है। इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, किसान अपनी उत्पादकता, आय और आजीविका में सुधार कर सकते हैं और साथ ही भारत में कृषि क्षेत्र के विकास में अपना अहम योगदान दे सकते हैं।


More Articles for You

खरीफ 2026: कैसे करें बदलते मौसम में समझदारी भरी खेती?

खरीफ सीजन भारतीय खेती का सबसे अहम दौर होता है। मानसून की पहली बारिश के साथ ही खेतों में हलचल …

Soybean 360°: Tracking the Market from Seed to Oil and Meal

From the oil in your kitchen to the feed that powers India’s poultry and dairy sectors, soybean touches multiple parts …

बजट 2026: कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों की आय बढ़ाने में बनेंगे गेम-चेंजर

भारत की कृषि आज बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। एक ओर जलवायु परिवर्तन, बढ़ती लागत और …

WhatsApp Connect With Us