खरीफ सीजन भारतीय खेती का सबसे अहम दौर होता है। मानसून की पहली बारिश के साथ ही खेतों में हलचल तेज़ हो जाती है और किसान यह तय करने लगते हैं कि इस साल क्या बोया जाए, कितना बोया जाए और किस बाज़ार को ध्यान में रखकर बोया जाए। लेकिन बदलते मौसम, लागत में बढ़ोतरी और बाज़ार की अनिश्चितता ने आज खरीफ की योजना को पहले से कहीं ज़्यादा सोच-समझकर करने की ज़रूरत पैदा कर दी है।
खरीफ 2026 सिर्फ एक और खेती का साल नहीं है, बल्कि यह वह सीजन हो सकता है जहाँ सही जानकारी और समय पर फैसले किसान की आमदनी में बड़ा फर्क डाल सकते हैं। अब खेती केवल परंपरा से नहीं, बल्कि डेटा, बाज़ार संकेतों और जोखिम प्रबंधन के आधार पर करनी होगी। इसी सोच के साथ यह गाइड खरीफ 2026 के लिए फसल चयन, संभावित बाज़ार ट्रेंड और दामों की दिशा को सरल भाषा में समझाने की कोशिश करता है।

फसल चयन क्यों हैं जरुरी?
- धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और अरहर पारंपरिक खरीफ फसलें हैं, लेकिन सिर्फ परंपरा के आधार पर फसल चुनना अब जोखिम भरा हो सकता है।
- फसल चयन करते समय जमीन की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता, लागत और बाजार की मांग को ध्यान में रखना जरूरी है।
- धान की मांग स्थिर है, लेकिन कम पानी वाले क्षेत्रों में इसकी लागत बढ़ सकती है। ऐसे में मक्का और बाजरा बेहतर विकल्प बन सकते हैं।
- मक्का की मांग पोल्ट्री फीड और एथेनॉल उद्योग से मजबूत है, जबकि सोयाबीन को तेल उद्योग से सहारा मिल सकता है।
- अरहर और उड़द जैसी दालें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ सरकारी समर्थन और घरेलू मांग के कारण सुरक्षित विकल्प मानी जाती हैं।
- कपास के दाम निर्यात और टेक्सटाइल उद्योग पर निर्भर करते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर रखना जरूरी है।
मौसम और लागत
- खरीफ 2026 की योजना बनाते समय मौसम को नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है।
- मानसून का पैटर्न अब अनिश्चित हो गया है – सूखा और बाढ़ दोनों का खतरा रहता है।
- ऐसे में कम अवधि और पानी में पनपने वाली किस्में अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकती हैं।
- बीज, खाद, कीटनाशक और मज़दूरी की लागत लगातार बढ़ रही है।
- इसलिए, केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि प्रति एकड़ मुनाफे पर ध्यान देना ज़रूरी है।
- कम लागत वाली फसल कभी-कभी ज्यादा शुद्ध आमदनी दे सकती है।

संभावित बाज़ार ट्रेंड 2026
- अब खेती सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सीधे बाज़ार से जुड़ चुकी है।
- 2026 में घरेलू और औद्योगिक स्तर पर मजबूत मांग वाली खरीफ फसलों को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
- इस श्रेणी में मक्का, सोयाबीन और दालें प्रमुख रूप से शामिल हैं।
- कटाई के तुरंत बाद फसल बेचने के बजाय सही समय का इंतज़ार करें, तो बेहतर दाम मिल सकते हैं।
- बेहतर कीमत पाने के लिए भंडारण सुविधा और बाज़ार की सही जानकारी भी बेहद ज़रूरी है।
- अक्सर कटाई के समय फसल की आवक ज्यादा होने से दाम गिर जाते हैं।
- लेकिन कुछ महीनों बाद वही फसल कम सप्लाई के कारण अच्छे भाव पर बिकती है।
खरीफ 2026 का मूल्य अनुमान
- दामों का सटीक अनुमान संभव नहीं, लेकिन ट्रेंड दिशा दिखाते हैं।
- सामान्य मानसून में धान और मक्का के दाम स्थिर से हल्के मजबूत रह सकते हैं।
- सोयाबीन के दाम अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार और घरेलू उत्पादन पर निर्भर करेंगे।
- दालों के दाम सरकारी खरीद और आयात नीति से प्रभावित होते हैं।
- एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधता अपनाना जोखिम कम करता है।

भारत सरकार ने कृषि वर्ष 2025-26 के लिए खरीफ खाद्यान्न का कुल उत्पादन 173.33 मिलियन टन रहने का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है।
कैसे लें बेहतर फैसले?
आज का किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि एक एग्री-एंटरप्रेन्योर है। खरीफ 2026 में वहीं किसान आगे रहेगा जो समय पर जानकारी ले, बाज़ार से जुड़ा रहे और अपनी फसल को सही प्लेटफॉर्म पर सही समय पर बेचे और योजना, भंडारण, वित्त और बिक्री इन चारों पर बराबर ध्यान दें। यहीं पर एग्रीबाज़ार और उसकी सहयोगी कंपनियां स्टारएग्री और एग्रीवाइज किसानों को निरंतर खेती में डाटा-आधारित सटीक फैसले लेने में मदद करती रही हैं।
एग्रीबाज़ार किसानों को सीधे बाज़ार से जोड़ता है और फसल चयन, बाज़ार ट्रेंड और जोखिम प्रबंधन पर विशेषज्ञों की सलाह प्रदान कर सही योजना बनाने में सहायता करता है। वहीं स्टारएग्री और एग्रीवाइज सुरक्षित आधुनिक भंडारण के साथ वित्त सुविधा प्रदान करता है। खरीफ 2026 की सही योजना के लिए इन सेवाओं का उपयोग किसान की आमदनी को नई दिशा दे सकता है।
FAQ:
1. खरीफ 2026 के लिए सबसे सुरक्षित फसल कौन-सी है?
यह आपकी ज़मीन, पानी और लागत पर निर्भर करता है। मक्का, दालें और सोयाबीन संतुलित विकल्प माने जा सकते हैं।
2. क्या फसल विविधता अपनाना ज़रूरी है?
हाँ, एक से ज़्यादा फसलें जोखिम को कम करती हैं और आमदनी को स्थिर बनाती हैं।
3. क्या दाम कटाई के बाद बढ़ सकते हैं?
कई फसलों में हाँ, बशर्ते आपके पास भंडारण और सही बाज़ार तक पहुँच हो।
4. मौसम की अनिश्चितता से कैसे बचें?
कम अवधि और कम पानी वाली किस्में चुनें और सलाहकार सेवाओं से जुड़ें।
5. किसान खरीफ 2026 के लिए सही जानकारी कहाँ से लें?
किसान सरकारी रिपोर्ट्स, मंडी भाव, मौसम पूर्वानुमान, कृषि विशेषज्ञों की सलाह और भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़कर फसल चयन, बाज़ार ट्रेंड और दामों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
Disclaimer:
The content published on this blog is provided solely for informational and educational purposes and is not intended as professional or legal advice. While we strive to ensure the accuracy and reliability of the information presented, agribazaar make no representations or warranties of any kind, express or implied, about the completeness, accuracy, suitability, or availability with respect to the blog content or the information, products, services, or related graphics contained in the blog for any purpose. Any reliance you place on such information is therefore strictly at your own risk. Readers are encouraged to consult qualified agricultural experts, agronomists, or relevant professionals before making any decisions based on the information provided herein. agribazaar, its authors, contributors, and affiliates shall not be held liable for any loss or damage, including without limitation, indirect or consequential loss or damage, or any loss or damage whatsoever arising from reliance on information contained in this blog. Through this blog, you may be able to link to other websites that are not under the control of agribazaar. We have no control over the nature, content, and availability of those sites and inclusion of any links does not necessarily imply a recommendation or endorsement of the views expressed within them. We reserve the right to modify, update, or remove blog content at any time without prior notice.

Connect With Us