समेकित कृषि: खेती को लाभदायक बनाएं, सालभर मुनाफा कमाएं

लगातार बढ़ती जनसंख्या और कम होती प्राकृतिक संसाधनों के कारण किसानों को भी अपने तरीके और तकनीक दोनों में बदलाव करने की आवश्यकता है। मौजूदा दौर में जब खेती में लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम होता जा रहा है, तो किसानों के लिए यह सोचना जरूरी हो जाता है कि वे अपनी कृषि प्रणाली में कौन-कौन से बदलाव कर सकते हैं ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त कर सके। ऐसे में ‘समेकित कृषि प्रणाली’ (Integrated Farming System) एक कारगर उपाय के रूप में उभरकर आई है, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है बल्कि खाद्य सुरक्षा के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

समेकित कृषि प्रणाली क्या है –

समेकित कृषि प्रणाली खेती की आधुनिक तकनीक है। इस तकनीक के जरिए खेती के सभी घटकों को शामिल किया जाता है, जिससे किसान सालभर आमदनी कमा सकते हैं। समेकित कृषि प्रणाली द्वारा किसान एक ही जमीन पर अपने मुख्य फसल के साथ-साथ मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम, सब्जी-फल, मशरूम की खेती को एक साथ कर सकते हैं। इसमें एक घटक को दूसरे घटक के उपयोग में लाकर संसाधनों का सही उपयोग किया जाता है। इससे किसान अपनी किसी एक फसल पर से निर्भरता कम कर नुकसान की संभावनाओं को घटा सकता है। यह कृषि प्रणाली लागत को कम कर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती है और किसानों की आमदनी में निरंतर वृद्धि करने में सहायक है।

समेकित कृषि प्रणाली के क्या हैं फायदे –

  1. एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की कृषि गतिविधियां होने के कारण किसान को कई स्रोतों से आय प्राप्त होती है। कृषि के साथ मधुमक्खी और मछली पालन से भी किसान अतिरिक्त आय कमा सकते हैं।

    2. विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है। वहीं फल और सब्जियों की खेती से भी किसान अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं।

    3. यदि किसी एक फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, तो अन्य कृषि गतिविधियों से घाटे की भरपाई कर सकते हैं। किसी एक फसल पर निर्भर ना रहते हुए अन्य स्त्रोतों से कमाई कर सकते हैं।

    4. खेतों में तालाब उपलब्ध है, तो मछली पालन से किसान की आमदनी बढ़ सकती है। इसके अलावा, मछली पालन से मिलने वाले अवशेष खाद्य के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं।

    5. किसान के पास पूरे वर्ष विभिन्न प्रकार की फसलें, दूध, मछली, अंडे और शहद उपलब्ध होते हैं, जिससे उनके परिवार की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

    6. यह प्रणाली जैविक तरीकों पर आधारित होने के कारण खेती में रासायनिक खाद का उपयोग कम होता है। खेतों और पशुओं के अपशिष्ट द्वारा निर्मित जैविक खाद बनाकर किसान अपनी मिट्टी की उर्वरता को बनाए रख सकते हैं।

    7. समेकित कृषि अपनाने से किसानों के परिवार के सभी सदस्यों को वर्षभर काम मिलता है, जिससे बेरोजगारी की समस्या कम होती है।

समेकित कृषि प्रणाली को कैसे अपनाएं –

समेकित कृषि प्रणाली में खेत का सही तरीके से विभाजन करना जरुरी है, ताकि फसल उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी के लिए अलग-अलग स्थान हो सकें। इसके साथ ही, फसल चक्र का पालन कर भूमि की उर्वरता बनाए रखना और जल प्रबंधन के आधुनिक तरीकों जैसे वर्षा जल संचयन और सिंचाई तकनीकों को अपनाना चाहिए। स्थानीय संसाधनों का उपयोग जैसे जैविक खाद और पशुओं के अवशेषों का पुनः उपयोग करके रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसके अलावा, कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षिण लेकर और नई तकनीकों का उपयोग कर किसान अपनी खेती को अधिक प्रभावी और लाभकारी बना सकते हैं।

यदि इसे वैज्ञानिक ढंग से अपनाया जाए, तो यह प्रणाली भारत में कृषि के भविष्य को बदल सकती है और किसानों को आत्मनिर्भर बना सकती है। इसमें एग्रीबाज़ार का डिजिटल प्लेटफॉर्म भी अपनी तकनीकी कृषि सेवाओं के जरिए निरंतर किसानों की मदद कर रहा है। बुआई से लेकर सही फसल मूल्य मिलने तक हर पड़ाव पर किसानों की सहायता करता है। एग्रीबाज़ार जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर किसान अपनी कृषि उत्पादकता को निसंदेह बढ़ा सकते हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को अधिक मजबूत कर सकते हैं।

More Articles for You

Can Satellite Data Become Agriculture’s Credit Score?

For years, agricultural lending in India has depended on a familiar set of questions. Does the farmer own land?What was …

सोयाबीन की अच्छी पैदावार चाहते हैं? बुवाई से पहले जानें ये 7 जरूरी बातें!

खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही किसानों की नजर आसमान पर टिक जाती है। पहली अच्छी बारिश के साथ खेतों …

बीज उपचार: स्वस्थ फसल, बेहतर अंकुरण और अधिक उत्पादन की कुंजी

किसान जब किसी नई फसल की तैयारी करता है, तो उसकी पूरी उम्मीद उस छोटे से बीज पर टिकी होती …

The Future of Farming: AI in Agriculture and Its Impact on Indian Farmers

India feeds 1.4 billion people. The backbone of that system is a farmer working an average of 0.6 hectares of …

WhatsApp Connect With Us