स्मार्ट सिंचाई की तकनीक अपनाएं, कम पानी में भी हरी-भरी खेती पाएं!

कुशल सिंचाई प्रणाली फसल की उपज और गुणवत्ता को बढ़ा सकती है और कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग को कम कर सकती है। खेती में पानी का सही समय एवं सही मात्रा में कुशलतापूर्वक उपयोग करना ही स्मार्ट सिंचाई है। सेंसर-आधारित यह प्रणाली वेब/मोबाइल ऐप के माध्यम से नियंत्रित की जा सकती है, जिससे पानी और पैसे दोनों की बचत करने और किसानों को दूर से भी सिंचाई की निगरानी करने में सहायता मिलती है। 

एग्रीबाज़ार अपनी ‘एग्रीनो’ सर्विस के जरिए विभिन्न जैव-भौतिकीय मापदंडों का उपयोग कर दिए गए क्षेत्र में बायोमास का अनुमान लगाने में मदद करता हैं। वही उपग्रह डेटा के आधार पर फसलों की निगरानी एवं सही तरीके से सिंचाई करने में सहायता प्रदान करता है। स्मार्ट सिंचाई प्रणाली को लागू करने के लिए सिस्टम में विभिन्न आईओटी सेंसर शामिल किए गए हैं। 

मृदा नमी सेंसर मिट्टी में लवणता(खारापन), नमी की मात्रा आदि विभिन्न महत्वपूर्ण डेटा को कैप्चर करता हैं। वहीं मौसम ट्रैकिंग सेंसर पौधों द्वारा अनावश्यक जल को वाष्प के रूप में शरीर से बाहर निकालता है। साथ ही पानी के वाष्पीकरण और अन्य मौसम की स्थिति की जानकारी देता है। प्लांट सेंसर पौधे पर लगे होते हैं जो पौधे में पानी के घटक के बारे में जानकारी निकालने में मदद करते हैं। 

स्मार्ट सिंचाई प्रणाली –  

1. ड्रिप सिंचाई – ये एक आधुनिक सिंचाई पद्धति है। इसका उपयोग उन क्षेत्रों में भी किया जाता है, जहाँ पानी की उपलब्धता कम है। इस पद्धति में पानी की आपूर्ति एक नली या पाइप का उपयोग करके जड़ों पर बूंद-बूंद करके की जाती है। 

2. रेन सिंचाई – इस सिंचाई प्रणाली का उद्देश्य ना केवल पानी की बचत करना बल्कि पौधे का संपूर्ण विकास करना है। इसके माध्यम से कम पानी वाले क्षेत्रों में भी आसानी से सिंचाई की जा सकती है और खेती का भरपूर लाभ लिया जा सकता है। 

3. फव्वारा सिंचाई – इस प्रणाली द्वारा पानी का हवा में छिड़काव किया जाता है और यह पानी भूमि की सतह पर कृत्रिम वर्षा के रूप में गिरता है। पानी का छिड़काव दबाव द्वारा छोटी नोजल या ओरीफिस में प्राप्त किया जाता है। 

कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जो पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, सिंचाई दक्षता बढ़ा सकती है जो पानी की बर्बादी को कम करने में मदद करती है। इन तकनीकों का सही तरीके से उपयोग कर किसान पानी की कमी में भी अपनी फसल की पैदावार और आय बढ़ा सकता है। 

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