रिले कृषि क्या है? जानें इसके फायदे और खेती करने का सही तरीका

खेती में इतनी मेहनत करने के बावजूद किसानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन या उतना फायदा नहीं मिल पाता। फसल कटने के बाद खेत को दोबारा तैयार करने और अगली बुवाई करने में समय, मेहनत और संसाधन लगते हैं, जिसमें दोबारा लागत बढ़ जाती है। साथ ही एक फसल की कटाई के बाद दूसरी फसल बोने तक खेत खाली रहता है और इस दौरान मिट्टी में मौजूद नमी भी धीरे-धीरे कम हो जाती है।

खासकर बारिश आधारित क्षेत्रों में यह स्थिति किसानों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में रिले कृषि (Relay Cropping) एक उपयोगी विकल्प बनकर सामने आया है, जिसमें पहली फसल की कटाई से पहले ही दूसरी फसल की बुवाई कर दी जाती है। इससे फसलों के बीच का खाली समय और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने मदद मिलती है और साथ ही लागत भी कम होती है।

रिले कृषि की विशेषता यह है कि किसान अगली फसल की शुरुआत के लिए पहली फसल के पूरी तरह कटने का इंतजार नहीं करते। पहली फसल जब पकने के अंतिम चरण में होती है, तब दूसरी फसल के बीज बो दिए जाते हैं। दोनों फसलें कुछ समय तक खेत में साथ बढ़ती हैं। पहली फसल की कटाई के बाद फिर दूसरी फसल को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती है। सही फसल संयोजन और समय पर बुवाई के साथ यह तकनीक खेती को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।

क्या है रिले कृषि और कैसे करती है काम?

रिले कृषि ऐसी फसल प्रणाली है, जिसमें पहली फसल की कटाई से पहले दूसरी फसल की बुवाई की जाती है। जैसे की, धान की फसल पकने के आखिरी चरण में खेत की नमी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मसूर, खेसारी या अन्य उपयुक्त फसल के बीज बोए जा सकते हैं। धान की कटाई के बाद खेत में बची नमी से दूसरी फसल की शुरुआती बढ़त में मदद मिलती है। यह तरीका उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, जहां फसल कटाई के बाद सिंचाई की सुविधा सीमित होती है।

रिले कृषि को कुछ क्षेत्रों में उतेरा या पैरा खेती भी कहा जाता है। हालांकि इनके खेती के तरीकों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए फसल का चुनाव स्थानीय मिट्टी, जलवायु, उपलब्ध नमी और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

क्या हैं रिले कृषि के प्रमुख फायदे?

1. खेत का बेहतर उपयोग: पारंपरिक खेती में पहली फसल की कटाई के बाद खेत तैयार करने और दूसरी फसल बोने में समय लगता है। रिले कृषि में अगली फसल की बुवाई पहले हो जाने से फसल चक्र के बीच का खाली समय कम हो सकता है। इससे एक ही कृषि मौसम में अतिरिक्त फसल लेने की संभावना बनती है।

2. मिट्टी की नमी का उपयोग: वर्षा आधारित खेती में मिट्टी की नमी महत्वपूर्ण संसाधन है। समय पर दूसरी फसल बोने से खेत में बची नमी का लाभ उठाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन यह मिट्टी, मौसम और फसल की पानी संबंधी आवश्यकता पर निर्भर करता है।

3. फसल विविधीकरण को बढ़ावा: रिले कृषि में दलहनी फसलों को शामिल करने से खेती में विविधता आती है। दलहनी फसलें जड़ों में मौजूद विशेष जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती हैं। इससे फसल प्रणाली को लाभ मिल सकता है, हालांकि मिट्टी की उर्वरता पर वास्तविक प्रभाव फसल प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

रिले कृषि में किन बातों का रखें ध्यान?

इस पद्धति के फायदे तभी मिलते हैं, जब दोनों फसलों के बीच पानी, पोषक तत्व, रोशनी और जगह को लेकर प्रतिस्पर्धा नियंत्रित रहती है। गलत समय पर बुवाई करने से दूसरी फसल कमजोर रह सकती है या पहली फसल की कटाई में परेशानी हो सकती है, इसलिए किसानों को रिले कृषि अपनाते समय इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

  • स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल संयोजन और बुवाई का समय तय करें।
  • मिट्टी की नमी और जल निकासी की स्थिति जांचें।
  • दूसरी फसल के बीज की मात्रा और बुवाई विधि का सही चुनाव करें।
  • पहली फसल की कटाई के दौरान दूसरी फसल को होने वाले नुकसान से बचाएं।
  • खरपतवार, कीट और रोगों की नियमित निगरानी करें।

रिले कृषि हर खेत के लिए उपयुक्त नहीं होती, इसलिए इसे अपनाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। मशीनों से बुवाई और कटाई करने में कठिनाई हो सकती है, इसलिए पहले से खेत और श्रम प्रबंधन की योजना जरूर बनाएं।

रिले कृषि अपनाते समय केवल फसल की बुवाई और उत्पादन पर ध्यान देना काफी नहीं है। बल्कि किसानों को फसल चयन, मौसम, मिट्टी की नमी और बाजार की संभावनाओं को भी समझना चाहिए। साथ ही तैयार उपज को कब और कहां बेचना है, भंडारण की जरूरत होगी या नहीं और खेती के लिए वित्तीय संसाधन कैसे जुटाए जा सकते हैं, इन सभी पहलुओं को भी समझना चाहिए। इसमें एग्रीबाज़ार का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों की मदद करता है।

यह प्लेटफॉर्म किसानों और कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों को कृषि व्यापार तथा बाजार संबंधी सेवाओं से जोड़ता है। वहीं, इसकी सहयोगी कंपनी स्टारएग्री आधुनिक भंडारण, परिवहन और गुणवत्ता परिक्षण की सुविधा प्रदान करती है। साथ ही, एग्रीवाइज किसानों और कृषि व्यापारियों को पात्रता तथा जरूरतों के अनुसार कृषि वित्त सुविधा उपलब्ध कराती है।

FAQ’s:

1. रिले कृषि क्या है?
पहली फसल की कटाई से पहले दूसरी फसल की बुवाई करना रिले कृषि कहलाता है।

2. धान के बाद कौन-सी फसलें बो सकते हैं?
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मसूर, खेसारी, सरसों या अलसी विकल्प हो सकती हैं।

3. रिले कृषि में बुवाई कब करनी चाहिए?
पहली फसल के पकने के अंतिम चरण में, दूसरी फसल और खेत की स्थिति के अनुसार बुवाई की जाती है।

4. क्या रिले कृषि में सिंचाई की जरूरत नहीं होती?
नहीं, सिंचाई की जरूरत मिट्टी की नमी, मौसम और फसल की आवश्यकताओं पर निर्भर करती है।

5. रिले कृषि का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
इससे खेत खाली रहने का समय कम हो सकता है और उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

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